188+ Train Shayari In Hindi | ट्रेन शायरी स्टेटस

Train Shayari In Hindi , ट्रेन शायरी स्टेटस
Author: Quotes And Status Post Published at: September 27, 2023 Post Updated at: June 18, 2024

Train Shayari In Hindi : तुम ठहरी CBSE टॉपर, मैं बिहार बोर्ड में फिल प्रिये, मैं हूँ भोजपुरिया खांटी, तू इंग्लिश में रेलम रेल प्रिये. इश्क ना हुआ रेल हो गई, देरी से भी आती है, इंतजार भी कराती है और अगले ही स्टेशन पर बेवफा भी हो जाती है.

तू जब पास होता है दिल की धडकन बढ़ जाती है, हमसफर बनकर तूने हमें जिंदगी को नया रंग दिया है !

जाने किस किस चीज़ की खातिर भटक रहे हैं, जिस रास्ते पर नज़र मारो हर जगह मुसाफिर भटक रहे हैं ||

कदम-कदम पे नया इम्तिहान रखती है,ज़िन्दगी तू भी मेरा कितना ध्यान रखती है।

नई चीज़ों से रु ब रु होना चाहते है तो एक बार अकेले सफर पर निकलें ||

प्यार में भले ही जूनून है ,मगर Dosti में सुकून है।

हमारी तो सिर्फ एक ही ख्वाहिश है, हर जन्म मेरे हमसफर तुम ही बनो !

एक-दो मिनट की कीमत वही समझ पाता है,जिसे घर जाना हो और ट्रैन छूट जाता है.

वो मंजिल ही क्या जिसके रास्ते में मजा न हो ||

कर रही है,अभी तय सफर ज़न्दगी, कहीं ना कहीं तो होगी बसर ज़िन्दगी ||

DOSTI सच्ची होनी चाहिए,पक्की तो सड़क भी होती HAI.

तू आता है और बारिश आ बरस जाता है, मैं पत्ते पर बूँद सी ठहर जाती हूँ तू रेल सा गुजर जाता है.

तुम हवाई जहाज की बिज़नेस क्लास,मैं खचाखच भरा लोकल रेल प्रिये,अमीरी-गरीबी का तुम नहीं समझती खेल प्रिये,तुम्हीं बताओ कैसे होगा अपना मेल प्रिये.

जीते जी न हो सकेगा अपना ये मेल प्रिये, चाहे तेरे पापा लेकर दे दे रेल प्रिये.

ट्रेन से यात्रा करते ये ध्यान आया, कि किसी ज्ञानी पुरूष ने कहा था कि पटरी पर सिक्का रख दो तो चुम्बक बन जाता है.

जिन्दगी की ट्रेन जब तक पटरी पर चलती है, तब तक जिन्दगी की हकीकत का पता नहीं चलता है.

कितने दुख हैं इस जीवन में, पर सफ़र पर निकल के देखो कितनी खुशियां हैं ||

ज़िन्दगी एक रेलवे स्टेशन की तरह है, प्यार एक ट्रेन है जो आती है और चली जाती है , पर दोस्त Enquiry Counter है ,जो हमेशा कहते हैं May I Help You !

खुशियां खरीदी नहीं जा सकती वो कोई सामान नहीं है, ज़िन्दगी बेहद खूबसूरत है मगर बिलकुल भी आसान नहीं है ||

आप जैसा हँसी हमसफर हो अगर, जा रहे हैं कहाँ सोचता कौन है !

टूटा हूँ ठोकर भी खा चूका दर-बदर मैं, पर छोड़ ना सका कुछ अलग ही नशा है ज़िन्दगी के सफर में ||

ख्वाहिश में मेरी केवल इतना गम है, कि मैं तेरी यादो के सहारे सफ़र में चलता जा रहा हूँ ||

तू आता है और बारिश आ बरस जाता है, मैं पत्ते पर बूँद सी ठहर जाती हूँ तू रेल सा गुजर जाता है.

भारतीय ट्रेन सी हो गई है जिंदगी की रफ़्तार, जैसे मैं माया के जाल में हो गया हूँ गिरफ़्तार.

"सफर में हूँ मंज़िल आँखों में बसाये, अभी अरमान मेरे अधूरे से है।"

"आरज़ू थी मिले हमसफ़र मुझे भी ज़िंदगी के सफर में, तलाश मेरी पूरी हुई जब ज़िंदगी ने मिलाया मुझे तुमसे इस सफर में।"

उल्फत में अक्सर ऐसा होता है, आँखे हंसती हैं और दिल रोता है, मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी, हमसफर उनका कोई और होता है !

रेल की पटरियों की माफ़िक है ये जिन्दगी, साथ-साथ चलती है फिर भी कोसो दूर है ये जिन्दगी.

किसी रेल सी है तू मैं किसी मुसाफिर सा जब भी गुरता हूँ तुझमे सफर का मायना बदल जाता है.

शहर में किराए का कमरा घर नहीं लगता है,भीड़ इतनी होती है कि अब ट्रैन में डर नहीं लगता है.

आज मैंने ट्रेन के सफ़र में ये जाना, कितना मुश्किल होता ट्रेन का पंचर बनाना. Train Shayari

आप जैसा हँसी हमसफर हो अगर, जा रहे हैं कहाँ सोचता कौन हैं !!

ज़िंदगी के इस सफर में रिश्तों का बोझ जितना कम हो, सफर उतना आसान हो जाता है ||

हमारी तो सिर्फ एक ही ख्वाहिश हैं, हर जन्म मेरे हमसफर तुम ही बनों !!

"अजीब सा सफर है ये ज़िंदगी, मंज़िल मिलती है मौत के बाद।"

जिंदगी में छांव है तो कभी धूप हैऐ जिंदगी न जाने तेरे कितने रूप हैं,जिंदगी में हालात जो भी होंलेकिन जिंदगी में मुस्कुराना नही भूला करते हैं।

शाम आई तो बिछुड़े हुए हमसफर, आंसुओं से इन आंखों में आने लगे, आंखें मंजर हुई काम नग़्मा हुए घर के अन्दाज ही घर से जाते रहे !

कुहरे का आसमां से धरती तक कहर, कि दूर दूर तक लोहपथगामिनी आये ना नजर.

कैसे छोड़ूँ इन बिगड़े दोस्तों का साथ, जिनको बिगाड़ने में मेरा ही हाथ था…!!

बातें तो हर कोई समझ लेता है, हमसफर ऐसा हो जो खामोशी भी समझे !

"ज़िंदगी की खूबसूरती देखना है तो कभी सफर पर निकलो।"

फटी जेब सी ज़िन्दगी, सिक्को से दिन लो आज फिर इक गिर कर गुम हो गया.

समझ जाता हूँ मीठे लफ़्ज़ों में छुपे फरेब को, ज़िन्दगी तुझे समझने लगा हूँ आहिस्ता आहिस्ता.

रिश्तें भी नफा-नुकसान के खेल बन गये है, प्लेटफार्म पर आती-जाती रेल बन गये है.

आज मैंने ट्रेन के सफ़र में ये जाना, कितना मुश्किल होता ट्रेन का पंचर बनाना.Train Shayari

ट्रेन को कहते है लोहपथगामिनी, तुम मेरी दिल की धड़कन हो यामिनी.

कभी फुर्सत मिले जब भी तो रंजिशे भुला देना,कौन जाने साँसों की मोहलतें कहाँ तक हैं।

कुछ बाते सभी को मालूम है कुछ रखे मैंने राज़ भी है, ठोकर लाखों खा चूका मगर मंज़िल की भूख आज भी है ||

अलग चला आहिस्ते चला, पर जब चला खुद के बनाए रास्ते पर चला ||

कुछ इस तरह फ़कीर ने ज़िन्दगी की मिसाल दी, मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी

अब घर में मैं मेहमान हो गया हूँ, रोज़ आता जाता हूँ, यूही लगता है अब बेघर हो गया हूँ मैं ||

प्रवासियों के लिए ख़ुशी का सबसे बड़ा पैगाम होता है, जब गाँव की रेल की रिजर्वेशन लिस्ट में अपना नाम होता है.

किसी रेल सी है तू मैं किसी मुसाफिर सा जब भी गुरता हूँ तुझमे सफर का मायना बदल जाता है.

राह भी तुम हो राहत भी तुम ही हो, मेरे सुख और दुख को बांटने वाली, हमसफर भी तुम ही हो !

छोटी छोटी बातों में पराया क्या करना, मुँह फेरकर किसी से वक्त बिताया क्या करना, जिन्दगी रेल की तरह गुजर जायेगी मन हसीन वक्त नफरतों में जाया क्या करना .

कभी शहर है तो कभी गावं है, ये ज़िन्दगी है कभी धुप है तो कभी छाव है ||

ग़ैरों से पूछती है तरीका निज़ात का,अपनों की साजिशों से परेशान ज़िंदगी।

जिन्दगी की ट्रेन जब तक पटरी पर चलती है, तब तक जिन्दगी की हकीकत का पता नहीं चलता है.

बहुत से लोग करते बहुत सी बातें, जब हम ट्रेन में सफ़र करने जाते.

चलती रेल से भागती हुई पेड़ को जो गिनते है, वो अपनी जिन्दगी में गजब की तरक्की करते हैं.

ज़िन्दगी के सफ़र में सबको साथ लेकर चलते रहो, वरना ज़िन्दगी अफ़सोस से भरी रहेगी ||

दुश्मन को जलाना और दोस्त के लिएजान की बाज़ी लगाना हमारी फितरत है।

रहे जिंदगी में यह कहानी सभी की है, हमराज कोई और है हमसफर कोई और है !

हमदर्द के दर्द में हम संग में थम गए, आखिर हुआ यूँ हम अकेले ही रह गए वो किसी और के संग गए ||

कुहरे का आसमां से धरती तक कहर, कि दूर दूर तक लोहपथगामिनी आये ना नजर.

छुक-छुक करके आगे बढ़ना, रेल कभी बनाते थे, बचपन में एक दुसरे के पीछे हम लग जाते थे,

वही रंजिशें वही हसरतें न ही दर्द-ए-दिल में कमी हुई,है अजीब सी मेरी ज़िन्दगी न गुज़र सकी न खत्म हुई।

सफर ज़िन्दगी का बिना ठहरे खूब चले, जब संग मेरे मेहबूब चले ||

"माना की ज़िंदगी में गम बहुत है, कभी सफर पर निकलो और देखो खुशियां।"

वो गुजर गई मेरे जीवन से, एक तेज रफ़्तार रेल की तरह, और मैं थरथराता रह गया, एक खाई पर लटकते हुए पुल की तरह.

बातें तो हर कोई समझ लेता है, हमसफर ऐसा हो जो खामोशी भी समझ ले !

ये रास्ते कहां तक हैं इनका कोई किनारा क्यों नहीं दिखता, इस तन्हाई में कोई सहारा क्यों नहीं दिखता ||

"मैं तो यूँ ही सफर पर निकला था, एक अजनबी मिला और उसने अपना बना लिया।"

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