44+ Shailesh Lodha Shayari In Hindi | शैलेश लोढ़ा शायरी

Shailesh Lodha Shayari In Hindi , शैलेश लोढ़ा शायरी
Author: Quotes And Status Post Published at: September 4, 2023 Post Updated at: September 4, 2023

Shailesh Lodha Shayari In Hindi : छत नहीं रहती, दहलीज नहीं रहती दीवारों दर नहीं रहता घर में बुजुर्ग ना हो तो घर, घर नहीं रहता। शैलेश लोढ़ा ताले है चाबियाँ है पर उनका आभास खत्म हो गया है, पड़ोसी है लेकिन उनका विश्वास खत्म हो गया है. शैलेश लोढ़ा

दिल से उसके फिर भी सदा दुआएं निकलतीखुशनसीब हैं वो लोग जिनके पास माँ है।

ताले है चाबियाँ है पर उनका आभास खत्म हो गया है, पड़ोसी है लेकिन उनका विश्वास खत्म हो गया है. शैलेश लोढ़ा

कभी जो गुस्से में आकर मुझे डांट देतीजो रोने लगूं में मुझे वो चुपातीजो में रूठ जाऊं मुझे वो मनाती,

धागे -धागेयादें बुनती ,खुद कोनई रुई सा धुनती,दिन भरतनी ताँत सी बजतीघर -आँगन में चलती माँ !

मेरे कपड़े वो धोती मेरा खाना बनातीजो न खाऊं में मुझे अपने हाथों से खिलातीजो सोने चलूँ में मुझे लोरी सुनाती,

मेरी राहों के काँटे चुन वो, खुद गुलाब बन जाती थीमैं बड़ा हुआ तो कॉलेज से, इक रोग प्यार का ले आया

हाथों से बालों को नोंचा, पैरों से खूब प्रहार कियाफिर भी उस माँ ने पुचकारा, हमको जी भर प्यार किया

सारे रिश्ते- जेठ दुपहरीगर्म हवा आतिश अंगारेझरना दरिया झील समंदरभीनी-सी पुरवाई अम्मा

सुला कर सोती थी जिसको वह अब सभर जगाता है.सुनाई लोरिया जिसको, वो अब ताने सुनाता है.

मेरी आंखों का तारा ही, मुझे आंखें दिखाता है.जिसे हर एक खुशी दे दी, वो हर गम से मिलाता है.

फटी -पुरानीमैली धोती ,साँस -साँस मेंखुशबू बोती ,धूप -छाँह मेंबनी एक सीचेहरा नहीं बदलती माँ !

अंधियारी रातों में मुझकोथपकी देकर कभी सुलातीकभी प्यार से मुझे चूमतीकभी डाँटकर पास बुलाती

चिंतन दर्शन जीवन सर्जनरूह नज़र पर छाई अम्मासारे घर का शोर शराबासूनापन तनहाई अम्मा

बच्चों के हाथ में मोबाइल देखता हूँतो बड़ा ही कष्ट होता है. इनके मातापिता से एक ही निवेदन है इनसेमोबाइल छीन लो और हाथ में किताब दे दो.शैलेश लोढ़ा

बच्चों के हाथ में मोबाइल देखता हूँ तो बड़ा ही कष्ट होता है. इनके माता पिता से एक ही निवेदन है इनसे मोबाइल छीन लो और हाथ में किताब दे दो. शैलेश लोढ़ा

सिखाने में क्या कमी रही मैं यह सोचूं,जिसे गिनती सिखाई गलतियां मेरी गिनाता है.

21वीं सदी का बस इतना सा प्रभाव है, पहले अभाव में खुशियां थीं, अब खुशियों का अभाव है. शैलेश लोढ़ा

छत नहीं रहती, दहलीज नहीं रहती दीवारों दर नहीं रहताघर में बुजुर्ग ना हो तो घर, घर नहीं रहता।शैलेश लोढ़ा

जुबा से कुछ कहूं कैसे कहूं किससे कहूं माँ हूंसिखाया बोलना जिसको, वो चुप रहना सिखाता है.

हम दुनिया के हैं अंग, वह उसकी अनुक्रमणिका हैहम पत्थर की हैं संग वह कंचन की कृनीका है

हम राजा हैं वह राज है, हम मस्तक हैं वह ताज हैवही सरस्वती का उद्गम है रणचंडी और नासा है.

जिस दिन तू शहीद हुआ ना जाने किस तरह तेरी माँ सोई होगी मैं तो बस इतना जानू कि वो गोली भी तेरे सीने में उतरने से पहले रोई होगी. शैलेश लोढ़ा

घर में झीने रिश्ते मैंनेलाखों बार उधड़ते देखेचुपके चुपके कर देती थीजाने कब तुरपाई अम्मा

बाबू जी गुज़रे, आपस में-सब चीज़ें तक़सीम हुई तब-मैं घर में सबसे छोटा थामेरे हिस्से आई अम्माआलोक श्रीवास्तव

हम जुल्फ की तारीफ़ में सारी रात गीत गा देते है, सुबह दाल में एक बाल आ जाएँ मुंह पर खींच कर मार देते है. शैलेश लोढ़ा

चूल्हे कीजलती रोटी सीतेज आँच में जलती माँ !भीतर -भीतरबलके फिर भीबाहर नहीं उबलती माँ !

स्नेह निर्झर झरतामाँ की मृदु लोरी सेहर पल अंक से चिपटाएउर्जा भरती प्राणो मेंविकसित होती पंखुडियाममता की छावो में

सब कुछ न्यौछावरउस ममता की वेदी परजिसकेआँचल की साया मेंहर सुख का सागर!

उसने खुद़ को खोकर मुझमेंएक नया आकार लिया है,धरती अंबर आग हवा जलजैसी ही सच्चाई अम्मा

हम जुल्फ की तारीफ़ में सारी रात गीत गा देते है,सुबह दाल में एक बाल आ जाएँ मुंह पर खींच कर मार देते है.शैलेश लोढ़ा

बहुत अकेली हूँदुनिया की भीड़ मेंफिर से अपनाममता का साया दे दो माँतुम्हारा स्नेह भरा प्रेमबहुत याद आता है माँअंजू गोयल

छत नहीं रहती, दहलीज नहीं रहती दीवारों दर नहीं रहता घर में बुजुर्ग ना हो तो घर, घर नहीं रहता। शैलेश लोढ़ा

सिर पररखे हुए पूरा घरअपनी –भूख -प्यास से ऊपर ,घर कोनया जन्म देने मेंधीरे -धीरे गलती माँ !

जन्म दात्रीममता की पवित्र मूर्तिरक्त कणो से अभिसिंचित करनव पुष्प खिलाती

ताले है चाबियाँ है पर उनका आभास खत्म हो गया है,पड़ोसी है लेकिन उनका विश्वास खत्म हो गया है.शैलेश लोढ़ा

जिस दिन तू शहीद हुआ ना जानेकिस तरह तेरी माँ सोई होगीमैं तो बस इतना जानू कि वो गोली भीतेरे सीने में उतरने से पहले रोई होगी.शैलेश लोढ़ा

जब बुज़ुर्गी में उसके दिन ढलने लगतेहम खुदगर्ज़ चेहरा अपना बदलने लगतेऐश-ओ-इशरत में अपनी उसको भूलने लगते

कभी आँख के आँसू मेरेआँचल से पोंछा करती वोसपनों के झूलों में अक्सरधीरे-धीरे मुझे झुलाती

बचपन में माँ कहती थींबिल्ली रास्ता काटे,तो बुरा होता हैरुक जाना चाहिए…

हम समुंदर का है तेज तो वह झरनों का निर्मल स्वर हैहम एक शूल है तो वह सहस्त्र ढाल प्रखर

हम बकवास हैं वह भाषण हैं हम सरकार हैं वह शासन हैंहम लव कुश है वह सीता है, हम छंद हैं वह कविता है.

वो सबको रुलाती वो सबको हंसातीवो दुआओं से अपनी बिगड़ी किस्मत बनातीवो बदले में किसी से कभी कुछ न चाहती,

सब दुनिया से रूठ रपटकरजब मैं बेमन से सो जाताहौले से वो चादर खींचेअपने सीने मुझे लगाती

8 हम एक शब्द हैं तो वह पूरी भाषा हैहम कुंठित हैं तो वह एक अभिलाषा हैबस यही माँ की परिभाषा है.

Recent Posts