1092+ Phool Shayari In Hindi | फूल शायरी

Phool Shayari In Hindi , फूल शायरी
Author: Quotes And Status Post Published at: October 3, 2023 Post Updated at: April 12, 2024

Phool Shayari In Hindi : कागज का फूल भी महकता है, जब कोई मोहब्बत से दे जाता है. आप आए तो बहारों ने लुटाई खुश्बू, फूल तो फूल थे काँटों से भी आई खुश्बू।

जिस फूल को हमने अपने प्यार से पाला है जब वे सूंघने लगे, तो वे दूसरों को सूंघने लगे।

दिल को सीख़ पर रख कर भून दीजिये, ~ पर ख़ुदारा मोहब्बत ना कीजिये **************************************

सूखे फूलों की तरह हम शायद ~ गिर चुके हैं तेरी किताबों से

ये नर्म मिजाज़ी है कि फूल कुछ कहते नहीं वरना कभी दिखलाइए कांटों को मसलकर।

आशिकों के महबूब के पैरों की धूल हूँ, हाँ, मैं एक लाल गुलाब का फूल हूँ.

अब ये नन्हा फूल बिन माली सा लगता है,माई तेरे बिन सब कुछ खाली सा लगता है |

गुलाब कभी सूरजमुखी नहीं हो सकता सूरजमुखी कभी गुलाब नहीं हो सकता सभी फूल महिलाओं की तरह अपने-अपने तरीके से सुंदर होते हैं

अब इत्र भी छिड़को तो ख़ुशबू-ए-मोहब्बत नहीं, वो दिन हवा हुये जब पसीना भी गुलाब था…

हम जान छिड़कते हैं जिस फूल की ख़ुशबू पर वो फूल भी कांटों के बिस्तर पे खिला होगा माधव मधुकर

बहारों की नजर में फूल और काँटे बराबर है.!!मोहब्बत क्या करेंगे दोस्त दुश्मन देखने वाले.!!

मुझ पर छाकर दूसरों पर रंग ज़माना छोड़ दो.!!ख़ुश्बू ने कहा प्रेम है सच्चा जो कहोगे वही कर जाएंगे.!!अगर तुम मुझसे अपनी पहचान बनाना छोड़ दो.!!

जिसके साथ बात करने से ही ख़ुशी दोगुनी और दुःख आधा हो जाए, वो ही अपना है! बाकी तो बस दुनिया ही है…!

फूल बिखराता हुआ मैं तो चला जाऊँगा.!!आप काँटे मेरे राहों में बिछाईये तो सही.!!

मोहब्बत का नतीजा,दुनिया में हमने बुरा देखा, ~ जिन्हे दावा था वफ़ा का,उन्हें भी हमने बेवफा दे

आज तकलीफ़ हो रही है हाल-ए-ज़िंदगी पर ~ काश उस से हद में रह कर मोहब्बत की होती

बहुत आसान है पहचान इसकी; अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है..!

जब आप आए दिल-ए-महफिल में तोबरसाई फिजाओं ने भी खुशबूकाटों से भरे बाग ने भी जैसे आजखुल कर लुटाई अपनी जुस्तजू

फूल के लिए जो ख़ुशबू है, वही व्यक्तित्व मनुष्य के लिए है।

कितना महफूज़ था गुलाब काटों की गोद में.!!लोगो की मोहब्बत में पत्ता-पत्ता बिखर गया.!!

कुछ जुल्म-ओ-सितम सहने की आदत भी है हमको,

हमारे इश्क का अंदाज कुछ अजीब सा था दोस्तों, लोग इन्सान देखकर मोहब्बत करते है, हमनें मोहब्बत करके इन्सान देख लिया…!!

स्वर्ग से तीन चीजें हमारे पास रहती हैं तारे, फूल और बच्चे।

अकेले फूल को कई काँटों से.!!इर्ष्या करने की ज़रुरत नहीं होती.!!

धारण की गई ख़ुशी ही बीज है साझा की गई ख़ुशी ही फूल है।

बड़े ही चुपके से भेजा था, मेरे मेहबूब ने मुझे एक गुलाब, कम्भख्त उसकी खुशबू ने, सारे शहर में हंगामा कर दिया.,

कोई काँटा चुभा नहीं होता.!!दिल अगर फूल-सा नहीं होता.!!

सारे जहाँ की खुशियाँ मैं तुझ पर लुटा दूँ.!!जिस राह से तू गुजरे वहां फूल बिछा दूँ.!!

जापानी कहावत हैं.!!अगर फूल को सुंदर बनाना है.!!तो इसे उगाना होगा.!!

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए पंखुड़ी इक गुलाब की सी है

वो सहन-ए-बाग़ में आए हैं मय-कशी के लिए.!!खुदा करे के हर इक फूल जाम हो जाए.!!

इंसानियत दिल में होती है…. हैसियत में नहीं ऊपरवाला कर्म देखता है वसीयत को नहीं..

अगर कुछ बनना है तो गुलाब के फूल बनो क्योंकि ये फूल उस के हाथ में भी खुश्बू छोड़ देता है जो इसे मसल कर फेक देता है.

तारीफ़ अपने आप की करना फिजूल है.!!खुश्बू खुद बता देती है कौन सा फूल है.!!

पगली तू गुलाब की फूल है जिसे न तो मै तोड़ सकता हूँ न ही छोड़ सकता हूँ.

आपके इंतजार में हर कोई यूंदरवाज़े पर टकटकी लगाए हैंफूल भी घरौंदे को छोड़ अपनेआज जैसे आपकी राह मेंपलके बिछाए हैं

ख़ौफ़ से यूँ ना आँखें बन्द करो ~ चूमने से कोई नहीं मरता

मुद्दतों कायम रहा ‘दिलों’ में अपना डेरा, ~ हम जहाँ भी रहे अच्छे-खासे रहे…

दूसरों को नसीहत के फूल देते वक्त खुद उनकी खुशबू लेना ना भूलना |

हमे अपना इश्क तो एकतरफा और अधूरा ही पसन्द है पूरा होने पर तो आसमान का चाँद भी घटने लगता है!!! ****************************************

अपनी यादों की ख़ुशबू भी हमसे छीन लोगे क्या? किताब-ए-दिल में अब ये सूखा गुलाब तो रहने दो.

अगर कुछ बनना है तो गुलाब के फूल बनो.!!क्योंकि ये फूल उस के हाथ में भी.!!खुश्बू छोड़ देता है जो इसे मसल कर फेक देता है.!!

अभी-अभी जिसे में एक प्यारा सा फूल देकर आय हूँ, खुदा कसम उसे मैं अपनी जिंदगी मानता हूँ।

इश्क मजबूर और नामुराद सही फिर भी जालिम का हर जगह बोल बाला है!!!

तारीफ़ अपने आप की करना फिजूल है, खुश्बू खुद बता देती है कौन सा फूल है?

बेवजह है तभी मोहब्बत है, वजह होती, तो साजिश होती…

गुलशन का हर एक गुलाब परखा हमने, फिर चुना एक गुलाब है, लाये बड़े प्यार से है जिसके लिए, वो खुद एक खूबसूरत गुलाब है.,

फूल तो फूल हैं आँखों से घिरे रहते हैं काँटे बे-कार हिफ़ाज़त में लगे रहते हैं

खुशी और दुख में.!!फूल हमारे स्थायी दोस्त हैं.!!

बड़े ही चुपके से भेजा था मेरे महबूब ने मुझे एक गुलाब.!!कम्भखत उसकी खुशबू ने सारे शहर में हंगामा कर दिया.!!

न किसी के दिल की हूँ आरजू.!!न किसी नजर की हूँ जुस्तजू.!!मैं वो फूल हूँ जो उदास हैं.!!न बहार आये तो क्या करूँ.!!

अब बस भी करो मेरा दिल दुखाना, ~ ये सुकून तुम्हें कहीं और भी मिल सकता है

नहीं मांगता ऐ ख़ुदा कि ज़िंदगी सौ साल की दे, ~ दे भले चंद लम्हों की लेकिन कमाल की दे

बजते मिलते ही दिल नहीं जाता हर मिलने वाले को अपना बनाया नहीं जाता और जो दिल में बस जाए एकबार उन्हें उम्र भर भुलाया नहीं जाता…

जब खिल खिलाके हस्ता है.!!मानो सोना बरसता है.!!मेरा जीवन गुलदस्ता है हमारे प्यार का.!!

खुद से भी रूबरू कभी करा दे मेरे मालिक मुझको; कब तक यूँ परायों में अपने होने के निशाँ ढूँढता फिरू

फुल यूँ ही नहीं खिलते.!!बीज को दफ़न होना पड़ता है.!!

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगामसअला फूल का है फूल किधर जाएगा |परवीन शाकिर

दुआ उस ने भेजी है कुछ इस अदा से, ~ सदा ख़ुश रहो तुम हमारी बला से **************************************

मै सूरज के नीचे अपने आप को सबसे खुसनसीब समझूंगा जो सौ फूलों को छूऊंगा और एक भी नहीं तोड़ूंगा।

अब के हम बिछड़े तो शायद ख़्वाबों में मिलेंजिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलेंं | अहमद फ़राज़

आशिकों के महबूब के पैरों की धूल हूँ.!!हाँ, मैं एक लाल गुलाब का फूल हूँ.!!

सीने में दिल दिल में दर्द, दर्द में यकीन, यकीन में ख्याल, ख्याल में ख्वाब, ख्वाब में तस्वीर, तस्वीर में आप, इतना डरावना ख्वाब, बाप रे बाप।

मुस्कुराती रहे ये जिंदगी तुम्हारी ये दुआ है हर पल खुदा से हमारी फुलों से सजी हो हर राह तुम्हारी जिससे महके हर सुबह तुम्हारी

आप तो गुलदस्ता का सबसे खुबसूरत फूल हैं हम तो बस आपके कदमो का धुल हैं.

मैं तोहफा बनकर पहुँच जाता हूँ जहाँ, मुझे देख मुस्कुरा देता है सारा जहाँ.,

न जाने कौन सा आँसू किसी से क्या कह दे.. ~ हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं..

दिल में खिलाने हैं तो फूल खिलाओ.!!कांटो में क्या रखा है.!!ज़िन्दगी जीनी है, तो खुलकर जियो.!!डर में क्या रखा है.!!

बीती रात की उदासियाँ अभी भी मौजूद ही थी… बहला ही रहा था दिल को, कि फिर रात हो गयी…

बस अपना ही गम देखा है… तुने कितना कम देखा है…

दे के दिल हम जो हो गए मजबूर इस में क्या इख़्तियार है अपना

************************************** बताओ ना कैसे तुम्हे भुलाऊँ, ~ तुम तो वाकिफ़ हो इस हुनर से….

फूलों से खूबसूरत कोई नहीं, सागर से गहरा कोई नहीं, अब आपकी क्या तारीफ करूँ, दोस्त में आप जैसा नालायक कोई नहीं।

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