1487+ Khafa Shayari In Hindi | खफा शायरी इन हिंदी

Khafa Shayari In Hindi , खफा शायरी इन हिंदी
Author: Quotes And Status Post Published at: October 2, 2023 Post Updated at: October 2, 2023

Khafa Shayari In Hindi : मुझको हसरत कि हक़ीक़त में न देखा उसको उसको नाराज़गी क्यूँ ख़्वाब में देखा था मुझे। उनसे खफा होकर भी देखेंगे एक दिन, कि उनके मनाने का अंदाज़ कैसा है।

Attitude तो बच्चे दिखाते हैहम तो लोगो कोउनकी औकात दिखाते है.!

मैं नहीं बेवफा मेरा ऐतबार कर ले, दे दे मुझे मौत या फिर प्यार कर ले.

अच्छा लगता है अपने आप को नीचा दिखाना आते जाते लोग बड़ा कुछ सिखा जाते हैं।

जीत हासिल करनी हो तो काबिलियतबढाओ किस्मत की रोटी तो कुत्तों को भीनसीब हो जाती है.. ।।

तूने ही लगा दिया इलज़ाम-ए-बेवफाई, अदालत भी तेरी थी गवाह भी तू ही थी.

वही साक़ी वही जुल्फ़े वही अल्लाह की बातें, ~ करेगा कब तू ग़ज़लों में , बशर की आह की बातें…

मुझको हसरत कि हक़ीक़त में न देखा उसको !!उसको नाराज़गी क्यूँ ख़्वाब में देखा था मुझे !!

मेरे हालात ने कर दिया था मुझे खामोश, ~ हम जरा चुप हुए तो तुमने याद करना ही छोड़ दिया !!

तेरे वादे तू ही जाने मेरा तो आज भी वही कहना है ~ जिस दिन मेरी साँस टूटेगी उसी दिन तेरी आस छूटेगी…

उसका इश्क़ भी चाँद जैसा था ~ जैसे पूरा हुवा तो घटने लगा

तोड़कर अहदे-करम न आशना हो जाइये बंदापरवर जाइये अच्छा खफा हो जाइये।

रंगीन ख्वाब ऊंचे शौकआगे जिंदगी पीछे मौत !

वो आए थे मेरा दुख-दर्द बाँटने के लिए,मुझे खुश देखा तो खफा होकर चल दिये

गिरा ना पाओगे लाख चाहकर भी मेरी शख्सियत को, मेरा कारवां मेरे चाहने वालों से चलता हैं न की नफरत करने वालों से…!!!

लोग सर फोड़ कर भी देख चुके ग़म की दीवार टूटती ही नहीं

थका हु थोड़ा रुका नही हुकोई इज्जत पे वार करे इतनाझुका नही हु..!!

वाह वाह कहने की आदत डाल लिजीये, मोहब्बत में अपनी बरबादियां लिखने का वक़्त आ गया हमारा…

ये आईने क्या दे सकेंगे तुम्हें तुम्हारी शख्सियत की खबर, कभी हमारी आँखों से पूछो कितने लाजवाब हो तुम।।

हुस्न यूँ इश्क़ से नाराज़ है अबफूल ख़ुश्बू से ख़फ़ा हो जैसे..

हर बार इल्जाम हम पर लगाना ठीक नहीं वफ़ा खुद से नहीं होती खफा हम पर होते हो।

तुम हसते हो मुझे हँसाने के लिए, तुम रोते हो मुझे रुलाने के लिए, तुम एक बार खफा होकर तो देखो, मर जायेंगे तुम्हें मानाने के लिए।

इतना जागा हूँ तेरी फ़ुर्क़त में ~ अब मेरी रात ही नहीं होती …

दिल तो बस एक बार ही टूटा था पर आस हर रोज टूटती हैं।

हम जमाने का ख्याल नहीं करते,जहां जमीर न माने वहाँ सलाम नहीं करते।

क्यों वो रूठे इस कदर के मनाया न गया,दूर इतने हो गए के पास बुलाया न गया,दिल तो दिल था कोई समंदर का साहिल नहीं,लिख दिया नाम वो फिर मिटाया न गया।

क्या अदाकारी है कि रूबरू सिसकते हैं हाल सुनकर के मेरा मुँह छिपा के हँसते हैं!!!

सारे फैसले खुदा के ~ फिर दिल लगाने की गलती मेरी कैसे…

मेरी आँखों में आँसू की तरह एक बार आ जाओ, तक़ल्लुफ़ से बनावट से अदा से चोट लगती है.

अब क्या कहूँ कि उम्र गुज़ारी है किस तरह, ~ ये भी कोई सवाल है, कुछ और बात कर…

ख़ुश्बू जैसे लोग मिले अफ़्साने में, एक पुराना ख़त खोला अन्जाने में

बिता हुवा वक्त साथ दे या न दे,पर आने वाला वक्त सलामी जस्त देगा!!

तुम से सदियों की वफ़ाओं का कोई नाता न था ~ बस तुमसे मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में!!!

तूने क्या सोचा डर जाऊँगाबेटा बाप हूँ तेरे घर तक आऊँगा

खफा नहीं हूँतुझसे ए जिंदगी,बस जरा दिल लगा बैठा हूँइन उदासियों से.

तेरे इक इक लफ़्ज़ को हज़ार मतलब दिये हमने ~ फ़िर भी चैन से सोने ना दिया तेरी अधूरी बातों ने..

सबके दिलो में बोछार लाई थी तू सबके लबो पर हसी लाई थी तू फिर क्यों पल भर की मेहमान बन कर आई तू क्यू रुखसत होकर दूर चली गई तू !

कुछ ऐसे हादसे भी होते हैं ज़िंदगी में ऐ दोस्त, इंसान बच तो जाता है मगर जिन्दा नहीं रहता !!

उनके देखने से जो आ जाती है चेहरे पे रौनक वो समझते हैं कि इस बीमार का हाल अच्छा है!!!

जैसे बदले मौसम वैसे बदली तुम, नयी हसरतों के सेज पर नया फूल सजा लिए तुमने, बजाए बेवफा तुम जिसका मुझे दर था..!!

वो बड़ा लाजवाब और बाजवाब शख्श था, ~ बस एक मोहब्बत के सवाल में उलझ गया…

उड़ा भी दो सारा अहम इन हवाओं में, ~ छोटे से जीवन में कब तक नफ़रत करोगे…

उतनी देर तक ही खामोश रहो जबतक लोग तुम्हें कमजोर न समझें…!

अपनी नाकामियों पे आख़िर-ए-कार मुस्कुराना तो इख़्तियार में है

ये मोहब्बत के हादसे अक्सर दिलों को तोड़ देते हैं, तुम मंजिल की बात करते हो लोग राहों में ही साथ छोड़ देते हैं.

मुझसे मेरी वफ़ा का सबूत मांग रहा है ! खुद बेवफ़ा हो के मुझसे वफ़ा मांग रहा है..!!

हर एक शख्स खफा मुझसे अंजुमन में था,क्योंकि मेरे लब पे वही था जो मेरे मन में था.

उड़ा दो सारी रंजिशें इन हवाओं में , ~ छोटी सी जिंदगी है , नफ़रत कब तक करोगे….. ???

तेरी बातों में लाख मिठास सही, पर जहर सा लगता है, तेरा किसी और से बात करना..

ख़फ़ा हैं फिर भी आ कर छेड़ जाते हैं तसव्वुर मेंहमारे हाल पर कुछ मेहरबानी अब भी होती है.

ये मैं अक्सर सोचता हूँ की वो हमें कैसे भूल गए होंगे, शायद हमें बेवफा मान कर, भूलने कीवजह मिल गयी होगी ।

कहानी जब भी लिखुंगा …अपनी उजडी हुई जिन्दगी की.. ~ सबसे मजबूत किरदार मे …जिक्र तेरा ही होगा …

एक तुम ही ना मिल सके वरना, ~ मिलने वाले बिछड़ बिछड़ के मिले

हाथ का मज़हब नहीं देखते परिंदे… जो भी दाना दे, ख़ुशी से खा लेते हैं…

मैंने रंग दिया हर पन्ना तेरे नाम से,मेरी किताबों से, ~ मेरी यादों से पूछ इश्क किसे कहते हैं।

बहुत दर्द देती है आज भी वो यादें, जिन यादों में तुम नजर आते हो.

दिल ने एक उम्मीद बरकरार रखी है ऐ दोस्तों ~ कही पढ़ लिया था कि सच्ची मोहब्बत लौटकर आती है!!!

हर बार इल्जाम हम पर हीलगाना ठीक नहीं,वफ़ा खुद से नहीं होतीऔर खफा हम पर होते हो.

ताले लगा दिए दिल को अब उसका अरमान नहीं, बंद होकर फिर खुल जाए ये कोई दुकान नहीं !!

अरे बदमाश क्या करेगा मेरी हिस्ट्री जान केप्यार से दो बात करले हमें अपना जीजा मान के

आज मैंने खुद से एक वादा किया है, माफी मांगूंगा तुझसे तुझे रुसवा किया है, हर मोड़ पर रहूँगा तेरे साथ साथ, अनजाने में मैंने तुझको बहुत दर्द दिया है !

वो कब थी तुम्हारी दोस्त जो छोड़ने की बात कर रहे हो, शायद तुम्हें ही गलतफहमी है जो इसे बिछड़ना नाम दे रहे हो.

​ उसने मेरी हथेली पे नाजुक सी ऊँगली से लिखा ” मुझे प्यार है तुझसे ” जाने कैसी स्याही थी वो लफ्ज मिटे भी नही और आज तक दिखे भी नही!!!

क्या जानो तुम बेवफाई की हद दोस्तों, वो हमसे इश्क सीखती रही किसी ओर के लिए.

मेरे बस मे हो तो लहरो को इतना हक़ भी ना दू…. ~ लिखु नाम तेरा किनारे पे और लहरो को छुने तक ना दू….

वो क्या रोयेगी मेरी दर्द पे जिसका दिल, फिदा है दुनिया के हर मर्द पे !

सुन पगली तुम्हारी फिक्र है मुझे शक नहीं तुम्हें कोई और देखे यह किसी को हक नहीं।

मत रख हमसे वफा की उम्मीद ऐ सनम, हमने हर दम बेवफाई पायी है, मत ढूंढ हमारे जिस्म पे जख्म के निशान, हमने हर चोट दिल पे खायी है.

थोड़ा सब्र कर मेरे भाईउड़ेंगे मगर अपने दम पर…!

मेरे लिखे लफ्ज़ ही पढ़ पाया वो बस.. ~ मुझे पढ़ सके इतनी तालीम कहाँ उसकी.

बुरे नहीं हैं हम बस किसीको अच्छे नहीं लगते !

दहशत गोली से नही दिमाग से करते हैं! जरूरी नहीं की लोग आग से जले कुछ लोग तो हमारे नाम से भी जलते हैं।

तेरे हुस्न पे तारीफों भरी किताब लिख देता, काश तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती.

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