888+ City Shayari In Hindi | शहर पर शायरी स्टेटस

City Shayari In Hindi , शहर पर शायरी स्टेटस
Author: Quotes And Status Post Published at: October 4, 2023 Post Updated at: April 11, 2024

City Shayari In Hindi : मेरे ख्वाब मुझे शहर ले कर आई, उदास हो गया भीड़ में देखकर तन्हाई. शहर और गाँव दोनों बदल गया हैं, इक ही घर में कई चूल्हा जल गया हैं.

रहते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते, कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस खाक नहीं होते।

माना की उससे बिछड़ कर हम उमर भर रोते रहे, पर मेरे मार जाने के बाद उमर भर रोयेगा वो!!

राजस्थानी मीणा परमात्मा के प्रेम में आंखों से जोआंसू गिरते हैं उसे बिन बादल की बारिश भी कहते है।

“ गाँव में, पैसे से जेब हल्कीऔर दिल के बड़े होते है,गैरों के मुसीबत में भीअपनों की तरह खड़े होते है….!!

भाड़ में जाये लोग ओर, लोगो की बातें, हम वैसे ही जियेंगे, जैसे हम है चाहते।

मिलता नहीं शहर में एक खैरियत पूछने वाला, हैसियत पूछने वाले लाखों आ जाएंगे।

मुझे मलूम है तुम्हेंबरसात देखनी हैमगर इन आँखों से सावनभी हार जाता है।

‘परिवार’ और घर जब साथ हो तो दुःख भी कम हो जाता है और सुख कम हो तो भी_बढ़ जाता है इसी लिए आज भी उन स्का ‘याद’ बहुत आता है,

कल एक छोरी को Message आयो बोली ओए मन रात न नींदकोनी आव मखो म कुणसो खाट किराए प देउ हूँ तो..

अब हलचल है दिल में नई उम्मीद की तलाश के लिए, कहना पड़ेगा अलविदा नई मंजिल की तलाश के लिए।

कुछ 🤝हाथ से उसके😌 फिसल गया🙄वह🤔 पलक झपक 😲कर निकला गया😇😇😇

ना थके हैं कभी पैर, ना कभी हिम्मत हारी है, जज्बा है कुछ बनने का जिंदगी में, इसलिये सफर जारी है !

वो करो जो दिल कहे, जिंदगी आपकी है किसी के बाप की नही।

सरफिरे मुसाफिर हैं हम,मंजिलो की चाह नहीं सफर का शौक रखते हैं।– Sarfire mushafhir hai hum,Manjilon ki chaah nahi safar ka shaukh rkhte hai.

जब-जब बादल बरसता है,सनम से मिलने को दिल तरसता हैं.

टाबर डोकरा शायरीआयो दिन खुशियों गोछोड़ो भेदभाव और अभिमान,सगला कूदो, नाचो गाओचाहे हो बच्चा, बूढा या जवान।

लहलहाते खेतों, और हवाओं की ताजगी सेमन शांत लगा,फिर से गाँव अपना और सहर अनजान लगा।

‘“ गाँव में चलती हैकितनी हसीन हवाएं,दम हो तो कोईइस तरह का मशीन बनाएं….!!

याद रखना दोस्त शहर और वक़्त किसी के लिए नहीं रुकते।

“ दिल खुश हो जाता हैगाँव के मेले में,ख़ुशी का पता हीनही शहर के झमेले में….!!

“ गाँव की प्यारी यादोंको दिल में सजाया करो,शहर में तरक्की कितनी भी करो लोपर गाँव अपनों से मिलने आया करो….!!

#गुलामी तो हम सिर्फ अपने ‘माँ-बाप’ की करते है, वरना, दुनिया के लिए तो हम कल भी #बादशाह थे, और आज भी।

बन्दा खुद की नज़र में सही होना चाहिए दुनिया तो भगवान से भी दुखी है!

जब से लोगों की परवाह करनी छोडी है, तब से जिंदगी खूबसूरत हो गई है।

“ की एक तेरा शहर पानी के लिए खून बहा देता हे और एक मेरा गाँव जो पानी न मिले तो प्यार बाँट लेता हे…!!

छुप के रहना है जो सबसे तो मुश्किल क्या है, तुम मेरे दिल में रहो दिल की तमन्ना हो कर!!

मोहब्बत करना है फिर से करना है, बार-बार करना हजार बार करना है, लेकिन सिर्फ़ तुम से ही करना है!!

“ बहुत वक्त हुआखुद से मिले हुए कल सुबह मेंअपने गांव जा रहा हु..!!

माना की जिंदगी में गम बहुत है , कभी सफर पर निकलो और देखो खुशियां ।

मैं मुल्क की हिफाजत करूँगाये मुल्क मेरी जान हैइसकी रक्षा के लिएमेरा दिल और जान कुर्बान हैजय हिन्द

टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख करवो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए

गांव ने पूछा फिर कब लौटोगे, इस लाजवाब सवाल ने मेरी बोलती बंद कर दी।

काश 😇फिर वो मिलने🤝 कि वजह मिल🤗 जाएँ …साथ वो 👍बिताया , वो⏳ पल मिल जाये👍चलो 🤗अपनी अपनी 👀आँखें बंद कर😌 लेंक्या पता 🙄खाव्बों मैं😱 गुजरा हुआ कल😁 मिल जाएँ🔥🔥

तुम मिल गए तो मुझ से नाराज है खुदा, कहता है कि तू अब कुछ मांगता नहीं है!!

निभाउंगी 🤝सख्ती से👍तुम्हारी हर बात मै🤝🤝दुःख💔 है मगर😜 कैसे नैनों की😇 रोकूंगी बरसात मै😅😅

कुछ नशा तेरी बात का हैकुछ नशा धीमी बरसात का है,हमे तुम यूँही पागल मत समझोयह दिल पर असर पहली मुलाकात का है।

यहाँ मौसम अपने रंग बदलते है लोग नहीं“अपना गाँव “

गांव में रहा हूँ और कुछ दिन ठहरा भी हूँ शहर में, पर दिल को सबसे ज्यादा सुकून मिला हैं गांव में।

गाँव में पला थासहरों से बस सपने में मिला था !तरक्की मिलीपैसे भी बहोत मिले…पर आज तक कोई अपना ना मिला !!

पहली मुलाकात थी और हम दोनो ही बेबस थे, वो जुल्फे न संभाल सके और हम खुद को!!

जिस दिन तेरे बिन रह लू |उसदिन खुद को मिटा दूंगा |मुझ से दूर जाने की बातें मत कर |दुनिया में आग लगा दूंगा |

“ शहर के लोग गम में पीते है,गाँव के लोग गम में ही जीते है….!!

शहर में यूँ हादसा कब तक होता रहेगा,इनके जिम्मेदारों को सजा कौन तय करेगा.

“ गांव में जान अब भी हैरूतबा और शान अब भी है…!!!

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं, रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं !

ए बारिश ज़रा थम के बरस,जब मेरा यार आ जाये तो जम के बरस,पहले न बरस की वो आ ना सके,फिर इतना बरस की वो जा ना सके।

“हम आजादी तभी पाते हैं, जब अपने जीवित रहने का पूरा मूल्य चुका देते हैं”- रविन्द्रनाथ टैगोर

‘“ की निम का पेड़ था बारिश थी और झूला था गाँव में गुजरा हुआ मेरा बचपन भी का बचपन था…!!

जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज़ हैं!

अकेला भी इस तरह पड़ गया हूं, कि मेरा हौसला भी साथ नहीं दे रहा है। Akela bhi is tarha pad gaya hun ki mera hosla bhi sth na de rha h.

साथ रहकर तूने संभाला है इतना,अब अलविदा कह फिर कमजोर न बना देना।

तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है,पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ.

इन अजनबी सी राहों में जो तू मेरा हमसफर हो जाये, बीत जाए पल भर में ये वक्त और हसीन सफर हो जाये !

रहने का मजा तो गाँव में हैं, शहर कहाँ पेड़ की छाँव में हैं.

धोरे माथे झूंपड़ी शायरीधोरे माथे झोपड़ीरमे बैठा टाबर नैना,मिट्टी का बनावे घरमिट्टी ही उनका खिलौना।

“ चेहरे पर ख़ुशी कमाने का है,दिल में दर्द तो पूरे जमाने का है.गाँव का सुकून चाहता हूँजो मर गया वो जूनून चाहता हूँ….!!

आज बारिश में तेरे संग नहाना हेसपना ये मेरा कितना सुहाना हेबारिश की बूंदे जो गिरे तेरे होठों पैउन्हें अपने होठों से उठाना हे।

पास थे, तो रोने की वजह बनते थे, दूर जाकर शायद मुस्कुराना सीख लें आप।

अब हर लम्हा तुम्हारे बिना सूना सा लगेगा, अलविदा कहकर तुम्हारी यादों में जीना पड़ेगा।

मंजिल बड़ी हो तो सफर में कारवां छूट जाता है, मिलता है मुकाम तो सबका वहम टूट जाता है ।

“ क्या जमाना था जब एक खत पूरा गांव पढ़ता था आज हर एक मोबाईल लेकर ‘मतलबी हो गया हे….!!

लिपट कर सीने से कह रही थीं वो आखिरी शामें, अलविदा कहने से पहले जालिम गले तो लगा लेते।

मोहब्बत में गुस्सा और शक़ वही करता है *जिसमें मोहब्बत कूट-कूट के भरी होती है.❤️

राज तो हमारा हर जगह पे है, पसंद करने वालों के दिल में और नापसंद करने वालों के दिमाग में।

“ यूं खुद की लाश अपनेकांधे पर उठाये हैंऐ शहर के वाशिंदोंहम गाँव से आये हैं…!!

अब उसकी मोहब्बत का नया दौर है जहां कल मैं था आज वहां कोई और है !

चाँद हो या सूरज, चमकते सब हैं अपने वक्त आने पर!

मेरे ख्यालों में वहीख्वाबो में वहीमगर उनके ज़हन मेहम है ही नहींहम जागते रहे और वोबेफिक्र सोती रहीएक बरिश ही थी जो हमारे साथपूरी रात रोती रही।

गांव में रहने में दुविधा यही है, वहां सुविधा नहीं है।

बिज़नस के नये गुण हर कोई सीखने लगा हैं, अब तो शहर में हवा-पानी भी बिकने लगा हैं.

जब लाइफ की सब #होप्स डूब रही हो पानी में, ”फॅमिली” की नाव, कही आस पास ही मिलेगी.

अलविदा कह रहा हूं तुमसे मैं, अब तमन्ना को बाकी न रही है, चली आना तुम भी पीछे-पीछे मेरे, यहां से सीधी बस मेरे शहर जा रही है। गुड बाय।

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