1427+ Chand Pe Shayari In Hindi | चाँद पर शायरी हिंदी में

Chand Pe Shayari In Hindi , चाँद पर शायरी हिंदी में
Author: Quotes And Status Post Published at: August 25, 2023 Post Updated at: January 25, 2024

Chand Pe Shayari In Hindi : एक अदा आपकी दिल चुराने कीएक अदा आपकी दिल में बस जाने कीचांद है आपका चेहराऔर हमें ज़िद है चांद को पाने की। इतना खूबसूरत इतफ़ाक़ हैअमावस की रात है और चाँद मेरे पास है।

तुम मेरे जीवन के चांद बन जाओ, और मैं हमेशा के लिए तुम्हारी चांदनी बन जाऊं।

ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए,मुझे बस तेरी की एक झलक चाहिए..!!

तू अपनी निगाहों से न देख खुद को, चमकता हीरा भी तुझे पत्थर लगेगा, सब कहते होंगे चाँद का टुकड़ा है तू, मेरी नजर से चाँद तेरा टुकड़ा लगेगा।

“ रातों में टूटी छतोंसे टपकता है चाँद…बारिशों सी हरकतें भी करता है चाँद….!!!

तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा मैंने,चाँद कहता रह गया मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ..!!

चलो चाँद का किरदार अपना लें हम दोस्तो, दाग अपने पास रखें और रौशनी बाँट दें.,

मोहब्बत भी चाँद की तरह दिखता हैं, जब पूरा होता हैं तो फिर घटने लगता हैं.,

“ चाँद भी हैरान दरियाभी परेशानी में है,अक्स किस का हैये इतनी रौशनी पानी में है…!!

चाँद को तारो का सहारा मिला है इस जहा को क्या नज़ारा मिला है हम खुद को खुश किसमत समझते है हमें आपका साथ सारी ज़िन्दगी का मिला है।

ख़ुशनशीबी है हमारी चाँद के साथ बात होती है, बदनसीबी है हमारी चाँद के बिना रात होती है।

ना चाँद का ख्वाब है, ना सितारों की चाहत है, जिंदगी की उडान के लिये तो, खूला आसमान ही काफी है।

कल चौदहवी की रात थी रात भर रहा चर्चा तेरा,कुछ ने कहा ये चाँद है, कुछ ने कहा चेहरा तेरा।

कितना भी कर ले, चाँद से इश्क़, रात के मुक़द्दर मे, अँधियारे ही लिखे हैं.,

वैसे तो कई दोस्त है हमारे जैसे आसमान में है कई तारे पर आप दोस्ती के आसमान के वो चाँद है जिसके सामने फीके पड़ते हैं सारे सितारे!

“ न चाहकर भी मेरे लब परये फरियाद आ जाती है,ऐ चाँद सामने न आ किसीकी याद आ जाती है….!!

ए चाँद तू मत सता मुझेप्यार किया हैं मैंने यूँ ना चिढ़ा मुझेगुदगुदाती हैं मुझे तेरी बातेयाद आती हैं पिय के संग बीती वो राते

तुम भी बिलकुल उस चाँद की तरह हो, खूबसूरत भी हो और बहुत दूर भी हो।

आज टूटेगा गुरूर चाँद का तुम देखना यारो !!आज मैंने उन्हें छत पर बुला रखा है !!

चाँद तू क्या मुस्कुराता हैंपता था तुझे मेरा सनम बेवफा हैंमुझे भी था मालूम ये साथ हमेशा ही अधुरा हैंलेकिन मेरे प्यार के आगे नफरत का मोल बहुत कम हैं

मोहब्बत खोजते हो और सकून भी चाहते हो।क्या ग़ज़ब करते हो यार तुम भी,अमावस की रात में मुकम्मल चाँद चाहते हो।

“ रात्रि का वक़्त औरआकाश में लालिमा है,क्या तुम्हें पता हैआज शरद पूर्णिमा है….!!

जरा ठहरो जी भर के देखुरोज़ कहा चांद ज़मीं पर उतरता है।

चांद को देख कर आपको याद करते हैतू पास नहीं इसीलिए चाँद से ही बात करते है।

न चाहते हुए भी मेरे लब परये फरियाद आ जाती है,ऐ चाँद सामने न आसनम की याद आ जाती है।

पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह !!ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ !!

कितना हसीन चाँद सा चेहरा है, उसपे शबाब का रंग गहरा है, खुदा को यकीन न था वफ़ा पे, तभी चाँद पे तारों का पहरा है.,

दिन में चैन नहीं ना होश है रात में खो गया है चाँद भी देखो बादल के आगोश में.

एक प्यारी सी दिल को चुराने की, एक इरादा रगों में बस जाने की, चांद सा हुस्न और तारे सा चमक,दिल में है हसरत तुम्हे पाने की.,

चाँद को देखूँ तो तेरा चेहरा नजर आता है,मैं इश्क़ में हूँ इतना तो मुझे समझ में आता है..!!

रुसवाई का डर है या अंधेरों से मुहब्बत खुदा जाने, अब मैं चाँद को अपने आँगन में उतरने नहीं देता.,

ए चाँद ना गुरुर कर खूबसूरती कीये तो मेरे सनम से कई कम हैंतुझ में तो बेवफाई का दाग हैंमेरा सनम हर मायने में बेदाग हैं

“ चाँद में नज़र कैसेआए तेरी सूरत मुझको,आँधियों से आसमाँ कारंग मैला हो गया….!!

पूछो इस चाँद से कैसे सिसकते थे हम, उन तन्हा रातों में तकिये से लिपटकर रोते थे हम, तूने तो देखा नही छोड़ने के बाद, दिल का हर एक राज़ चाँद से कहते थे हम।

रौशनी चाँद की होती है, मचलना दिल को पड़ता है,जो तेरी याद आती है, संभलना दिल को पड़ता है।

क्यों मेरी तरह रातों को रहता है परेशान, ऐ चाँद बता किस से तेरी आँख लड़ी है।

चाँद अपने आप को कहते हो तुम आओ देखें हो गई है रात भी….

खूबसूरत गजल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा… निगाहें शेर पढ़ती हैं तो लब इर्शाद करते हैं…

कुछ वो कोरे से हैं, कुछ मैं सादा सा, जैसे एक ही आसमां में दो चांद हों आधा-आधा सा

चाँद अपने आप को कहते हो तुम,आओ देखें हो गई है रात भी !

जिस चांद को हज़ारों चाहने वाले होवो क्या समझे एक तारे की कमी।

आज शाम ये चाँद भी क्या खूब दिखती है, देखूं करीब से जो इसको मेरा मेहबूब दीखता है।

ख्वाबो की बातें वो जाने जिनका नींद से रिश्ता हो, मैं तो रात गुजारती हुँ चाँद को देखने में.,

खुद को चाँद बना लो ताकि, दाग अपने पास और रौशनी पूरी दुनिया को दे सको !!!

“ तू चाँद और मैं सितारा होता,आसमान में एक आशियाना हमारा होता,लोग तुम्हे दूर से देखते,नज़दीक़ से देखने का,हक़ बस हमारा होता…!!

ना समझ दिल ये एक गलती कर बैठा, बिन पूछे मुझसे ये फैसला कर बैठा, टूटा तारा भी नहीं गिरता ज़मीन पर, कम्बख़त दिल चांद से है इश्क़ कर बैठा.,

तुम सुबह का चाँद बन जाओ, मैं सांझ का सूरज हो जाऊँ, मिलें हम-तुम यूँ भी कभी, तुम मैं हो जाओ, मैं तुम हो जाऊँ।

कितना हसीन चाँद सा चेहरा है, उसपे शबाब का रंग गहरा है, खुदा को यकीन न था वफ़ा पे, तभी चाँद पे तारों का पहरा है।

प्यार में मेरा दिल खो गया, और वो मेरा ईद का चाँद हो गया !!!

एक ये दिन हैं जब चाँद को देखे, मुद्दत बीती जाती है, एक वो दिन थे जब चाँद खुद, हमारी छत पे आया करता था।

‘क़मर’ अपने घर उन को मेहमाँ बुला कर,बिला चाँद के चाँदनी रात कर ली..!!

मुन्तजिर हूं कि तारों को जरा आंख लगे, चांद को बुलालूंगा आंगन में इशारा कर के.,

मोहब्बत भी चाँद की तरह दिखता हैं,जब पूरा होता हैं तो फिर घटने लगता हैं.

चाँद को चाँद नहीं देते उसने पहचाना नहीं चाँद को जान गया होता अगर चाँद को तो टुकड़ों में नहीं बिखेरता चाँद को

ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए,एक चाँद फ़लक पर निकला हो एक छत पर आ जाए..!!

“ रात होगी तो चाँद भी दुहाई देगा,ख्वाबों में तुम्हे वो चेहरा दिखाई देगा,ये मोहब्बत ज़रा सोचके करना,एक आंसू भी गिरा तो सुनाई देगा…!!!

ऐ चाँद चला जा क्यों आया है तू मेरी चौखट पर, छोड़ गया वो शख्स जिसके धोखे में तुझे देखते थे.,

इश्क़ करना है तो रात की तरह करो, जिससे चाँद भी क़ुबूल और उसके दाग भी क़ुबूल।

ईद के चांद को देखकर तुम्हें याद करते हैं, वो भी एक दौर था जब तुम्हें ऐसे ही घंटों निहारा करते थे।

देवता मेरे आँगन में उतरेंगे कब ज़िंदगी भर यही सोचता रह गयामेरे बच्चों ने तो चाँद को छू लिया और मैं चाँद को पूजता रह गया

ऐ काश मेरी किस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए… एक चाँद फलक पर निकला हो एक छत पर आ जाए…

चाँद से प्यारी चाँदनी, चाँदनी से प्यारी रात, रात से प्यारी ज़िन्दगी, ज़िन्दगी से प्यारे आप.,

“ चार दिन की चाँदनी शाम के साथ ढल गई,क्या लेकर आया था इंसान,शरीर के साथ जल गई….!!

“ क्यों मेरी तरह रातों को रहता है परेशान,ऐ चाँद बता किस से तेरी आँख लड़ी है…!!

बेचैन इस क़दर था कि सोया न रात भर, पलकों से लिख रहा था तेरा नाम चाँद पर.,

मोहब्बत थी तो चाँद अच्छा था, उतर गई तो दाग भी दिखने लगे.,

तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा मैंने, चाँद कहता रह गया मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ.,

“ चाँद तारो में नज़र आये चेहरा आपका,जब से मेरे दिल पे हुआ है पहरा आपका,चाँद मत मांग मेरे चाँद जमीं पर रहकर,खुद को पहचान मेरी जान खुदी में रहकर…!

चाँद तो अपनी चाँदनी को ही निहारता है उसे कहाँ खबर कोई चकोर प्यासा रह जाता है.

रुसवाई का डर है या अंधेरों से मुहब्बत खुदा जाने, अब मैं चाँद को अपने आँगन में उतरने नहीं देता.,

“ इजाजत हो तो मैं भीतुम्हारे पास आ जाऊँ,देखों ना चाँद के पासभी तो एक सितारा है….!!

मोहब्बत को मेरी चाँद मुबारकजान को मेरी ये रात मुबारक,चाँद से प्यारी सूरत वाली कोमेरे खुदा रखना हमेशा सलामत…।

ना छत पर है कभी आता ना घर से कभी निकलता है मेरा मेहबूब जैसे चाँद सा घटाओ में चिपटा है..!

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