1598+ Karma Bhagavad Gita Quotes In Hindi | Quotes On Karma

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Author: Quotes And Status Post Published at: June 23, 2023 Post Updated at: April 4, 2024

Karma Bhagavad Gita Quotes In Hindi: अपने अपने कर्म के गुणों का पालन करते हुए,प्रत्येक व्यक्ति सिद्ध हो सकता है..!! जो पुरुष न तो कर्मफल की इच्छा करता है और,न कर्मफलों से घृणा करता है वह संन्यासी जाना जाता है..!!

इस सम्पूर्ण संसार में कोई भी व्यक्ति महान नही जन्मा होता है। बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते हैं।

“ सबसे समझदार औरस्थिर बुद्धि वाला व्यक्ति वही है,जो सफलता मिलने पर अहंकारमें नहीं आता और विफलतामें गम में नहीं डूब जाता…!!

शर्म करने से कुछ नहीं पा सकते, श्रम करने से बहुत कुछ पा सकते हो।

जब भी और जहाँ भी अधर्म बढ़ेगा।तब मैं धर्म की स्थापना हेतु,अवतार लेता रहूँगा।

सुखी जीवन की कुंजी आपके द्वारा अपने जीवन में किया गया वह हर कर्म है जो बिना किसी को चोट पहुँचाए दूसरों के लिए सुखद हो।

मानवता ह्रदय में होती है औकात में नहीं, ईश्वर कर्म देखता है वसीयत नही।

अगर साफ नियत से मांगा जाए, तो ईश्वर नसीब से बढक़र देता है।

इंसानियत दिल में होती हैहैसियत में नहीं, ऊपर वालाकर्म देखता है वसीयत नहीं ।

केवल भाग्यशाली योद्धा ही ऐसा युद्धलड़ने का अवसर पाते हैजो स्वर्ग के द्वार के समान है ।

हमेशा याद रखना, बेहतरीन दिनों के लिए बुरे दिनों से लड़ना पड़ता है।

“ इतिहास कहता है कि कल सुख था,विज्ञान कहता है कि कल सुख होगा,लेकिन धर्म कहता है, अगर मन सच्चा औरदिल अच्छा हो तो हर रोज सुख होगा…!!

वासना , क्रोध और लालचनरक के तीन दरवाजे है ।

“ सेवा सब की करो मगरआशा किसी से मत रखो ,क्योंकि सेवा का सहीमूल्य ईश्वर ही दे सकते हैं…!!

“ किसी भी व्यक्ति कोअच्छे से जाने बिना ,दूसरों की बातें सुनकरउसके प्रति कोई धारणाबना लेना मूर्खता है…!!

“ जिसे कह दिया जाए वो शब्द होते हैंजिसकी अभिव्यक्ति ना हो पाए वो अनुभूति,और जिसे चाह कर भी नाकहा जाए वो होती हैं मर्यादा…!!

God is in everything as well as above everything.In Hindi: भगवान प्रत्येक वस्तु में है और सबके ऊपर भी.

केवल व्यक्ति का मन हीकिसी का मित्र और शत्रु होता है।

किसी भी व्यक्ति को ना तो समय से पहले और ना ही भाग्य से अधिक कुछ मिलता है। लेकिन उसे सदैव पाने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।

जिस मनुष्य के पास सब्र की ताकत हैउस मनुष्य की ताकत का कोईमुकाबला नहीं कर सकता।

वक़्त कभी भी एक जैसा नही रहता है, उन्हें रोना भी पड़ता है, जो बेवजह दूसरों को रुलाते हैं।

बीते कल और आने वाले कल की चिंता नही करनी चाहिए,क्योकि जो होना है वही होगा जो होता है,अच्छा ही होता है इसलिए वर्तमान का आनन्द लो..!!

समय से पहले और भाग्य से अधिक कभी किसी को कुछ नही मिलता है। – श्री कृष्ण (श्रीमद्‍भगवद्‍गीता)

“ मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है,जैसा वो विश्वास करता हैवैसा वो बन जाता है…!!!

ह्रदय की सुंदरता आपकी सूरत से नही, आपके सत्कर्मों से पता चलती हैं।

जो जीवन के मूल्य को जानता हो,इससे उच्चलोक की नहीं अपितु अपयश प्राप्ति होती है..!!

“ वक़्त कभी भी एकजैसा नही रहता है,उन्हें रोना भी पड़ता है,जो बेवजह दूसरों को रुलाते हैं…!!!

हर मनुष्य के अंदर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और ईर्ष्या जैसी भावनाएं हमें अपने और दूसरों के प्रति नुक्सान पहुंचा सकती हैं।

जो मनुष्य अपने कर्मफल प्रति निश्चिंत है और जो अपने कर्तव्य का पालन करता है, वहीं असली योगी है।

” माफ करना औरशांत रहना सीखिए ऐसीताकत बन जाओगेकि पहाड़ भी रास्ता देंगे…!!!

ईश्वर हमें कभी सजा नहीं देते,हमारे कर्म ही हमें सजा देते हैं!

“ कोई भी इंसानजन्म से नहीं बल्किअपने कर्मो से महान बनता है…!!!

“ जब जब इस धरती पर पाप,अहंकार और अधर्म बढ़ेगा,तो उसका विनाश कर पुन:धर्म की स्थापना करने हेतु,में अवश्य अवतार लेता रहूंगा…!!

इस आत्म-विनाशकारी नरक के तीन द्वार हैं: काम, क्रोध और लोभ। इन तीनों का त्याग करो।

जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए स्वयं को अधिक तनावग्रस्त न करें, क्योंकि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब न हों, बदलेंगी जरूर।

याद रखना अगर बुरे लोग सिर्फ समझाने सेसमझ जाते तो बांसुरी बजाने वालाकभी महाभारत होने नही देता ।

जो भी काम आए, उसे साधना समझकर पूरा करो।

अनेक जन्म के बाद जिसे सचमुच ज्ञान होता है, वह मुझको समस्त कारणों का कारण जानकर मेरी शरण में आता है। ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ होता है।

जो पैदा हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है, जैसे जो मृत है उनके लिए जन्म। इसलिए जिसे बदल नहीं सकते उसके लिए शोक मत करो।

हे अर्जुन! जो जीवन के मूल्य को जानता हो। इससे उच्चलोक की नहीं अपितु अपयश प्राप्ति होती है।

बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण केलिए बिना आशक्ति के काम करने चाहिए ।

“ जब मनुष्य अपने जीवन में किसीएक चुनौती को जीवन का केंद्र मान लेता हैं,तब वो जीवन में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता….!!

देखने लायक व्यक्ति की खूबसूरती नहीं बल्कि उसके कर्म होते हैं।

“ मनुष्य अपने जीवन में जो भी कर्म रूपी बीज बोता है,भविष्य में उसी का फल उसे प्राप्त होता है…!!

जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित हैऔर मृत्यु के पश्चात् पुनर्जन्म भी निश्चित है।

हे अर्जुन! जो बुद्धि धर्म तथा अधर्म,करणीय तथा अकरणीय कर्म में भेदनहीं कर पाती, वह राजा के योग्य है।

मन अशांत है और इसे नियंत्रित करना कठिन है ,लेकिन अभ्यास से इसे वश मे किया जा सकता है ।

हे अर्जुन ! जो कोई भी व्यक्ति जिस किसी भीदेवता की पूजा विश्वास के साथ करने की इच्छा रखता है,में उस व्यक्ति का विश्वास उसी देवता में दृढ़ कर देता हूं।

व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में रखने के लिए बुद्धि और मन को नियंत्रित रखना होगा।

जो मनुष्य फल की इच्छा का त्याग करके केवल कर्म पर ध्यान देता है, वह अवश्य ही जीवन में सफल होता है।

जो लोग ह्रदय को नियंत्रित नही करते है,उनके लिए वह शत्रु के समान काम करता है..!!

“ जब तक शरीर हैतब तक कमजोरियां तो रहेगी हीइसलिए कमजोरियों की चिंता छोड़ोऔर जो सही कर्म हैउस पर अपना ध्यान लगाओ….!!!!

“ मन अशांत है और उसेनियंत्रित करना कठिन है,लेकिन अभ्यास से इसेवश में किया जा सकता है…!!!

“ कौन क्या कर रहा है,कैसे कर रहा हैऔर क्यों कर रहा है।इन सब से आप जितनादूर रहेंगे उतना ही आप खुश रहेंगे…!!!

~ अपने आपको ईश्वर के प्रति समर्पित कर दो, यही सबसे बड़ा सहारा है। जो कोई भी इस सहारे को पहचान गया है वह डर, चिंता और दुखों से आजाद रहता है।

“ जो व्यवहार आपकोदूसरो से पसन्द ना होऐसा व्यवहार आपदूसरो के साथ भी ना करे…!!!

जो होने वाला है वो होकर ही रहता है, और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता,ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है, उन्हें चिंता कभी नही सताती है।

जो लोग भक्ति में श्रद्धा नहीं रखते,वे मुझे पा नहीं सकते।अतः वे इस दुनिया में जन्म-मृत्यु केरास्ते पर वापस आते रहते हैं।

जो सब प्राणियों के दुख-सुख को अपने दुख-सुख के समान समझता है और सबको समभाव से देखता है, वही श्रेष्ठ योगी है।

अपने आपको भगवान के प्रति समर्पित कर दो,यही सबसे बड़ा सहारा है जो कोई भी इस सहारे को,पहचान गया है वह डर, चिंता और दुखो से आजाद रहता है..!!

मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है,लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है..!!

“ कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्किअपने कर्मो से महान बनता है…!!!

“ अकेले रहना तुम्हें यह भीसिखाता है कि वास्तव मे तुम्हारेपास स्वयं के अलावा और कुछ भी नहीं…!!!

“ सिर्फ दुनिया के सामने जीतनेवाला ही विजेता नहीं होता,बल्की किन रिश्तों के सामने कबऔर कहाँ पर हारना है,यह जानने वाला भी विजेता होता है…!!

“ कोई भी इंसान जन्म सेनहीं बल्कि अपने कर्मो सेमहान बनता है…!!

इंसान हमेशा अपने भाग्य को कोसता हैयह जानते हुए भी कि भाग्य से भी ऊंचाउसका कर्म है जिसके स्वयं के हाथों में है।

जीवन मैं कभी भी घुस्सा/क्रोध ना करें यह आपके जीवन के ध्वंस कर देगा।

“ जो अच्छा लगे उसे ग्रहण करोऔर जो बुरा लगे उसका त्यागफिर चाहे वह विचार हो कर्म हो , या मनुष्य…!!!

“ जीवन में कभी भी किसीसे अपनी तुलना मत कीजिए,आप जैसे है सर्वश्रेष्ठ है…!!

“ किसी का अच्छा ना कर सकोतो बुरा भी मत करनाक्योंकि दुनिया कमजोर हैलेकिन दुनिया बनाने वाला नहीं…!!!

“ जब भविष्य धुंधला पड़ने लग जाता है, तब आपको अपने वर्तमान में ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है…!!!

गीता में लिखा है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तब इंसान के बात करने का तरीका बदल जाता है।

जो महापुरुष मन की सब इच्छाओं को त्याग देता है और अपने आप ही में प्रसन रहता है, उसको निश्छल बुद्धि कहते है।

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