43+ Dusro Ko Bolne Se Pehle Khud Ko Dekho Quotes

Dusro Ko Bolne Se Pehle Khud Ko Dekho Quotes
Author: Quotes And Status Post Published at: June 30, 2023 Post Updated at: May 27, 2024

Dusro Ko Bolne Se Pehle Khud Ko Dekho Quotes: पलट कर जवाब देना बेशक़ गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो "नीर" आज कल लोग बोलने की हदें भूल जाते है- अब मैं अपने आस्तीन में सांप पाल लेता हूँ जब भी वो डसने को आये गिरेबान झाँक लेता हूँ

दूसरों के साथ अपने संचार में हमेशा दयालु और सम्मानजनक बनने का प्रयास करें।

सब मारने को जाते हैं, लेकिन अपने अंदर, गिरेहबान में नहीं झाकते है।

कभी भी दुसरो को कुछ बोलने से पहले खुद को देख लेना चाहिए क्या पता सामने वाला इंसान अपनी जगह सही हो।

दूसरों के साथ संवाद करते समय अपने स्वर और हाव-भाव से सावधान रहें, क्योंकि ये अशाब्दिक संकेत भी प्रभावित कर सकते हैं कि आपके शब्दों को कैसे माना जाता है।

है कितना ऐब मुझ में, हर रोज माँपता हूँ आईना बाद में,पहले गिरेबान झाँकता हूँ

दुसरो को कुछ बोलने से पहले खुद को देख लेना अच्छा होता है क्योकि कई बार गलती हमारी ही होती है।

झूठ बोलने की आदत सी हो गयी है, मेरी ज़िन्दगी झूठा बनकर जीना बन गयी है, मेरी ज़िन्दगी झूठे मुखौटों से भर सी गयी है, मैंने खुदको छुपा दिया है इन परदो के पिछे।

गलतियां जब दूसरों की गिनाया करो... तो पहले खुद के गिरेबान में झांक कर आया करो...

बदलती हुई चीजें भले ही अच्छी लगती हो, लेकिन बदलते हुए अपने कभी अच्छे नही लगते......

हमेशा दुसरो को कुछ बोलने से पहले अच्छी तरह से सोच लेना चाहिए क्योकि बोला गया शब्द वापस नहीं आता।

याद रखें कि संचार एक दो तरफा सड़क है, और दूसरों के साथ एक संवाद बनाने का प्रयास करें जो सम्मानजनक, खुला और उत्पादक हो।

कोई कहो उनकों की ज़रा झाँके अपने गिरेबान में जिन्हें कमी दिखती है मेरे संस्कार और ख़ानदान में

अपने शब्दों और कार्यों की जिम्मेदारी लें, और यदि आपने अपने शब्दों से किसी को चोट पहुंचाई है तो माफी मांगने और सुधार करने के लिए तैयार रहें।

दूसरे को बुरा बोलने से पहले खुद में एक बार झांक के देखो, क्या पता वक़्त और हालात तुम्हे वही करने को मजबूर कर दे।

अब मैं अपने आस्तीन में सांप पाल लेता हूँ जब भी वो डसने को आये गिरेबान झाँक लेता हूँ

लटक जाएं पंखे से या जहर फांकने लग जाएं अगर अपने गिरेबान में सब झांकने लग जाएं

बदलते तो इंसान हैं, वक़्त तो एक बहाना है।

धीरे धीरे बहुत कुछ बदल रहा है, लोग भी…रिश्ते भी…और कभी कभी हम खुद भी।

बोलने से पहले सोचना हमेशा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि आपके द्वारा कहे गए शब्द दूसरों पर शक्तिशाली प्रभाव डाल सकते हैं।

खुद को माफ़ नहीं कर पाओगे, जिस दिन जिंदगी में हमारी कमी पाओगे..

वही दूसरों की मदत कर सकता हैं, जो दर्द के एहसास को समझता हैं.

किसी को कुछ बोलने से पहले सोचना जरूर क्योकि बोले गए शब्द केवल माफ़ किये जा सकते है, लेकिन भुलाये नहीं जा सकते।

मुझे बुरा बोलने वाले देख लो एक गिरेबान तुम्हारे अंदर भी है।

सक्रिय श्रवण कौशल का अभ्यास करें, जैसे स्पष्ट प्रश्न पूछना और जो आपने सुना है उसे वापस प्रतिबिंबित करना, यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप वास्तव में समझ रहे हैं कि दूसरे क्या कह रहे हैं।

दुनिया में कोई गलत नहीं होता उसके लिए वो सही है हमारे लिए हम सही है।

कुछ भी हो जाए पर इरादें नेक रखों, दूसरों की मदद के लिए दिल में प्रेम रखों

दुसरो को कुछ बोलने से पहले खुद को देखो उसके बाद किसी पर कीचड़ उछालो

आलोचनाओं को उसी तरह स्वीकार करिए, जिस तरह आप अपनी प्रशंसा को स्वीकार करते हैं।

किसी को कुछ बोलने से पहले सोचना जरूर क्योकि बोले गए शब्द केवल माफ़ किये जा सकते है, लेकिन भुलाये नहीं जा सकते।

दूसरों के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश किए बिना दूसरों के बारे में धारणा या निर्णय लेने से बचें।

गरीबों की गुहार सुनाई नहीं देती उनको दौलतमंद हो तो सारे बाशिंदे हो जातें हैं लोग हर किसी के सामने फैलाया न करो दामन फटा गिरेंबा देखकर अंधे हो जातें हैं लोग

नहीं देखता दूसरों के घर या मकान में झांकता हूं तो मैं बस अपने गिरेबान में

बोलने से पहले, इस बात पर विचार करने के लिए कुछ समय निकालें कि आपके शब्दों को कैसे समझा जा सकता है और क्या वे स्थिति के लिए उपयुक्त हैं।

शुक्र मना ऐ वक़्त! तू इंसान नहीं है, मुझ पर अब तू इतना मेहरबान नहीं है, सपनों से रिश्ता तेरा तीन सौ दो का है, लहू से खाली तेरा गिरेबान नहीं है।

किसी भी स्थिति में शक्ति की गतिशीलता को पहचानें, और अपने शब्दों का उपयोग उन लोगों के उत्थान और समर्थन के लिए करने का प्रयास करें जो हाशिए पर या वंचित हो सकते हैं।

धीरे धीरे बहुत कुछ बदल रहा है, लोग भी…रिश्ते भी…और कभी कभी हम खुद भी।

याद रखें कि हर किसी का अपना अनूठा दृष्टिकोण होता है, और उन दृष्टिकोणों को सुनना और उनका सम्मान करना महत्वपूर्ण है।

पलट कर जवाब देना बेशक़ गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो "नीर" आज कल लोग बोलने की हदें भूल जाते है-

हमने ये तो नहीं कहा की, आपके लिए कोई दुआ ना मांगे बस इतना कहते है की दुआ में, कोइ आपको ना मांगे।

दूसरों के लिए गलत बोलने वाले, कभी अपनी तरफ नहीं देखते, की वो खुद क्या हैं..!!

मुझे आँकने से पहले अपने गिरेबान में झाँक लो ।।

अगर आपको अपने सम्मान की कोई फिक्र नहीं तो दूसरो को दोष देना बेकार है।

किसी भी चीज़ के लिए अपनी अहमियत को कम मत समझो, क्योंकि आत्मसम्मान से बड़ा और कुछ है।

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