1153+ Karma Status In Hindi | कर्मा कोट्स हिंदी में

Karma Status In Hindi , कर्मा कोट्स हिंदी में
Author: Quotes And Status Post Published at: October 18, 2023 Post Updated at: March 28, 2024

Karma Status In Hindi : अगर आप हर किसी के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं, तो वापिस आपको भी ऐसा ही मिलने वाला है।” तुम्हारे भीतर से जितनी घृणा निकलती है, उतनी ही वापिस आती है।

कर्म हमें वह देने में कभी असफल नहीं होते जिसके हम हकदार हैं !

आज आप प्रकृति का विनाश करेगें, कल ये आपकी सभ्यता का विध्वंस कर देगी !

रिश्तों की अहमियत को न समझने वाले अपने कर्मों से तो सावधान रहें, क्योंकि रिश्ते जीवन का सबसे मूल्यवान अंग होते हैं।

अच्छा करो और अच्छा तुम्हारा पीछा करेगा।

मुझे पता है कि किसी दिन आपको एहसास होगा कि आपने क्या खोया है। जब तक आप पीड़ित हैं तब तक मैं और खुश रहूंगा। खैर, यह है कि कैसे काम करता है।

कर्म आखिरकार सामने आता है। जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे। जल्द ही या बाद में, ब्रह्मांड आपको वो परोस देगा जिसके आप हकदार हैं।

दिलों में खोट है, जुबान से प्यार करते है, बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते है।

दूसरों के प्रति दयालु बनें भले ही वे आपके लिए न हों।

क्या मिलना है ये कर्म की बात है, क्या लेना है ये धर्म की बात है।

इंसान भाग्यशाली नहीं होता कभी भी जन्म से,उसका भाग्य बनता है कर्म से।

किसी ने आप के साथ बुरा किया है, तो छोड़ दो उसे आगे बढ़ो, उसका कर्म उसको सजा देगा।

मुझे उम्मीद है कि मेरे कुछ करने से पहलेकर्म आपके चेहरे पर थप्पड़ मारेंगे।

प्यार से बड़ा कोई धर्म नहीं होता,परोपकार से बड़ा कोई कर्म नहीं होता।

हर व्यक्ति को उसके कर्म करने की पूरी आज़ादी हैलेकिन कर्म के परिणामों में चुनाव, उसके हाथ में नही।

मददगार बनें भले ही आपकी, मदद करने वाला कोई न हो !

आज कुछ अच्छा करो और भविष्य में, तुम्हें कुछ अच्छा भी मिलेगा। कुछ अच्छा करो और कुछ अच्छा पाओ।

ये जरूरी तो नहीं कि #इंसान हर रोज मंदिर जाए.. बल्कि कर्म ऐसे होने चाहिए की #इंसान जहाॅ भी जाए मंदिर# वहीं बन जाए!!

अगर किसी के लिए काँटे बिछाओगे तोवापस काँटे ही मिलते हैंऔर किसी के लिए फूल बिछाओगे तोआपको वापस फूल ही मिलेंगे।

सफलता हमारा परिचय दुनियां को करवाती है और असफलता हमें दुनियां का परिचय करवाती है ।

कार्रवाई और प्रतिक्रिया: जैसा कि आप बोते हैं, वैसा ही आप काटेंगे।

कर्म अपना समय बिताता है, आपको हमेशा ध्यान रखना होता है।

दुनिया में प्रेम से बड़ा कोई धर्म नहीऔर दूसरों की भलाई से बड़ाकोई कर्म नही।

जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें हमेशा सकारात्मक कर्म करने चाहिए, क्योंकि कर्म ही हमारे भविष्य को निर्धारित करते हैं।

‘कर्मा’ और ‘प्रेम’ में सबसे बड़ा अंतर यह है कि- प्रेम जितना दिया जाये उतना लौट कर कभी नहीं आता…

तूफ़ान जीवन में सिर्फ़ अस्त–व्यस्त करने नही आते, कुछ आपकी मंज़िलो के रास्ते साफ़ करने भी आते है।

आप सभी से छुपा सकते हैं लेकिन फिर भी, कर्म आपको देख रहा है !

अच्छे कर्म और अच्छी बातें एक दिन आपके पास ज़रूर वापिस आती है।

अन्य लोगों के साथ वैसा व्यवहार करें जैसा आप चाहते हैं कि वे आपका सम्मान करें क्योंकि जो भी घूमता है वह चारों ओर से वापिस आता है।

जब तक कर्म मौजूद है, तब तक दुनिया बदलती है। हमेशा कर्म का ध्यान रखना होगा।

यह जानना अच्छा है कि यदि आप इसे अब और नहीं कर सकते, तो इसे लेने के लिए कर्म तैयार है।

दूसरों के प्रति दयालु बनें भले ही वेआपके लिए न हों।

हम अपने कर्मफल से बच नहीं सकते। हमारे कर्म ही आधार हैं जिस पर हम खड़े हैं।

टूटा हुआ विश्वास और छूटा हुआ बचपन, ज़िंदगी में दुबारा वापस नहीं मिलता। दूसरा मौक़ा, सिर्फ़ कहानियाँ देती है ज़िंदगी नही।

इससे पहले कि आप बदला लेने का विचार करें, दो कब्र खोदें।

कर्म जीवन का मुख्य विषय हैं, शब्दों का हेर फेर भले ही पकड़ नहीं आता हैं, पर सच में, हर कोई कर्म से पहचाना जाता हैं ।

कोई मेरा बुरा करे वह उसका कर्म है।में किसी का बुरा न करुँ,वो मेरा धर्म है।

मनुष्य जब असाधारण कार्य कर दिखाता है, वह यश का कारण बन जाता हैं।।”

कर्म अपना समय काटता है। आपको हमेशा बाहर देखना होगा।

लोग आपके साथ कैसा व्यवहार करते हैंयह उनका कर्म है। आपकी कैसी प्रतिक्रिया है?

“ किसी ने आप के साथ बुरा किया हैतो छोड़ दो उसे आगे बढ़ोउसका कर्म उसको सजा देगा…!!!

सफल होना चाहते हो तो फल की नहींअपने कर्म की चिंता करनी होगी।

तुम्हारे भीतर से जितनी घृणा निकलती है, उतनी ही वापिस आती है।

“ जीवन की सबसे बडी क्षति मृत्यु नही हैसबसे बडी क्षति तो वह हैजो हमारे अन्दर ही मर जाती है….!!

आपके अच्छे कर्मों की फल प्राप्ति, आपको अंतिम समय पर ही होती है !

Karma क्या है? सीधे शब्दों में कहें तो ये क्रिया की प्रतिक्रिया है.. चाहे वो अच्छी है या बुरी।

इस संसार में वही जीवित है जिसने यश एवं कीर्ति के कर्म किये.

आप किसी का नुकसान नहीं कर सकते क्योंकिकिसी ने आपका नुकसान किया है।आप वैसे ही भुगतान करेंगे जैसे वे करेंगे।

हमेशा याद रखिये आप आपने बुरे कर्मों के फल से नहीं भाग पाएंगे

अपने कर्म से दोस्ती कर लीजिये, आप बहुत फायदे में रहेंगे.जो काम आ पड़े, साधना समझ कर पूरा करो।

जैसे धधकती आग लकड़ी को राख में कम कर देती है, उसी तरह, आत्म-ज्ञान की आग सभी कर्म को राख में बदल देती है।।

बस एक बात याद रखें कि यह आपके और दूसरों के बीच नहीं है और यह हमेशा आपके और भगवान के बीच है।

“ हिसाब रखो आपने अच्छेकर्मों के साथ किये हुये बुरेकर्मों का भी ईश्वर उसकेबदले भी तुम्हें कुछ देगा….!!!

आपके कर्म ही आपकी पहचान है,वरना एक नाम के हजारों इंसान है।

जैसे एक बछड़ा हजार गायों की भीड़ में भी अपनी माँ को ढून्ढ लेता है, वैसे ही कर्मा करोड़ों लोगों में अपने करता को ढून्ढ ही लेता है।

तकदीर और नसीब का रोना मत रो इंसान, यह सब तुम्हारे कर्मों पर निर्भर करता है !

टूटा हुआ विश्वास और छूटा हुआ बचपन,ज़िंदगी में दुबारा वापस नही मिलता।दूसरा मौक़ा,सिर्फ़ कहानियाँ देती है ज़िंदगी नही।

भाग्य में और कुछ नहीं बल्कि हमारे पुराने किए कर्मों का लेखा जोखा है।

कर्म पर विश्वास करो, अगर अच्छा बोया है तो अच्छा ही काटोगे।

जैसे एक बछड़ा हजार गायों की भीड़ में भी अपनी माँ को ढून्ढ लेता है, वैसे ही कर्मा करोड़ों लोगों में अपने करता को ढून्ढ ही लेता है।

भाग्य में और कुछ नहीं बल्कि हमारे पुराने किए कर्मों का लेखा जोखा है।

“💐💐 ज़िन्दगी कर्म है या भ्रम, समझ में नहीं आती । औरों को देख कर्म, खुद को देख भ्रम लगती है ।। 💐💐 ”

आपके कर्मों की गूँज शब्दोंकी गूँज से भी ऊंची होती है।

मनुष्य जब असाधारण कार्य कर दिखाता है, वह यश का कारण बन जाता हैं.

प्रत्येक अपराध और हर दयालुता से, हम अपने भविष्य को जन्म देते हैं।

“ काम करने से पहले सोचनाबुद्धिमानी काम करते हुएसोचना सतर्कता और कामकरने के बाद सोचना मूर्खता है…!!

कर्म का कोई मेनू नहीं है। काबिलियत के अनुसार ही फल मिलता है।

जैसा जाएगा वैसा ही आएगा। दूसरों के साथ वैसा करें जैसा आप स्वयं प्राप्त करना चाहते हैं।।

अगर आप जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं, तो भगवान भी आपकी मदद करता है।

अपने कर्म अच्छे रखना इस सम्पूर्ण सृष्टि का सबसे बड़ा धर्म है।

जब रिश्ते तूफान से भी बड़े होते हैं, तभी आपके कर्म आपकी सहायता करते हैं।

ये जरूरी तो नहीं कि इंसान हर रोज मंदिर जाए,बल्कि कर्म ऐसे होने चाहिए,की इंसान जहाँ भी जाए,मंदिर वहीं बन जाए।

लोग उनके पापों के लिए दंडित नहीं होते, बल्कि पापों द्वारा होते हैं।

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